यह सप्ताह वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण ट्रेडिंग सप्ताहों में से एक है। अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का जून डेटा 14 जुलाई को जारी किया जाएगा, जबकि फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श पहली बार कांग्रेस के समक्ष गवाही देंगे। ये दोनों घटनाएं विदेशी मुद्रा बाजार पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं।
बाजार को उम्मीद है कि जून CPI साल-दर-साल 4.1-4.3% के स्तर पर रहेगा, जो मई के 4.2% से लगभग अपरिवर्तित है। यदि डेटा उम्मीद से अधिक आता है, तो डॉलर के मजबूत होने की संभावना है क्योंकि फेड ब्याज दरों को उच्च बनाए रख सकता है। इसके विपरीत, यदि CPI अनुमान से कम रहता है, तो डॉलर पर दबाव बढ़ सकता है।
भारतीय रुपया और एशियाई मुद्राएं इस CPI डेटा के परिणाम पर काफी हद तक निर्भर करेंगी। व्यापारियों को सलाह दी जाती है कि वे इस महत्वपूर्ण सप्ताह के लिए उपयुक्त जोखिम प्रबंधन रणनीतियां तैयार करें।