वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में इस सप्ताह डॉलर की मजबूती देखी गई है, जो मिडिल ईस्ट के बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व की नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण हुई है। निवेशक सुरक्षित मुद्राओं की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर को व्यापक समर्थन मिल रहा है।
EUR/USD और GBP/USD पर दबाव
EUR/USD जोड़ी 1.1609 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो कई महीनों के निचले स्तर के करीब है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की नरम नीतियों और क्षेत्र में आर्थिक सुस्ती के कारण यूरो पर दबाव बना हुआ है। वहीं GBP/USD 1.3305 पर है, जो ब्रेक्सिट के बाद के व्यापार समझौतों को लेकर अनिश्चितताओं के बीच कमजोर बना हुआ है।
तेल की कीमतों पर प्रभाव
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि WTI 82 डॉलर के स्तर को पार कर गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतें 90 डॉलर तक जा सकती हैं।
बॉन्ड यील्ड में बदलाव
अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 4.607% पर पहुंच गई है, जो निवेशकों के बीच ब्याज दरों में और वृद्धि की उम्मीदों को दर्शाता है। फेडरल रिजर्व के अगली बैठक में दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि की संभावना है, जो डॉलर को और मजबूती प्रदान कर सकती है।
बाजार का दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पावधि में डॉलर की मजबूती जारी रहने की संभावना है। निवेशकों को भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और फेड के नीतिगत संकेतों पर करीबी नजर रखनी चाहिए। उभरते बाजारों की मुद्राओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि डॉलर की मजबूती से उन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
विदेशी मुद्रा व्यापारियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने जोखिम प्रबंधन को मजबूत रखें और अस्थिरता बढ़ने पर स्टॉप-लॉस का उपयोग करें। बाजार में तेजी से बदलाव की संभावना को देखते हुए सतर्क रुख अपनाना बुद्धिमानी होगी।