अगस्त के अंत में कमजोर डॉलर और घटती बॉन्ड यील्ड के माहौल में कमोडिटी बाजार सकारात्मक रहा। सोने की कीमत 4,600 डॉलर प्रति औंस से ऊपर बनी हुई है और लगभग 4,617 डॉलर पर कारोबार कर रही है, जो 24 घंटों में लगभग 0.5% की बढ़त है। वहीं WTI कच्चे तेल की कीमत बेहतर माँग की उम्मीदों और आपूर्ति सहारे से लगभग 2% बढ़कर 81 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर लौट आई है।
डॉलर की कमजोरी सोने और तेल जैसी डॉलर में तय वस्तुओं की होल्डिंग लागत घटाती है, वहीं बॉन्ड यील्ड घटने से ब्याज न देने वाले सोने की अवसर लागत भी घट जाती है। इससे सोने और कमोडिटी बाजार में पूँजी का प्रवाह जारी रहा।
तकनीकी दृष्टि से सोने का 4,600 डॉलर से ऊपर बने रहना 4,650–4,700 डॉलर के प्रतिरोध क्षेत्र को परखने का रास्ता खोलता है, बशर्ते डॉलर कमजोर बना रहे और यील्ड कम रहे। WTI तेल को 80 डॉलर पर सहारा मिला है और अगला प्रतिरोध 83 डॉलर पर है।
सोने और तेल में निवेश करने वालों को याद रखना चाहिए कि कमोडिटी में उच्च उतार-चढ़ाव होता है और यह आपूर्ति-माँग, आर्थिक और भू-राजनीतिक कारकों से प्रभावित होती है। अनुबंध के नियमों को ठीक से समझना, मार्जिन और स्टॉप लॉस सख्ती से तय करना तथा एक दिशा में ज्यादा बड़ी स्थिति नहीं रखना उचित है।
कुल मिलाकर कमोडिटी बाजार कई जटिल कारकों से तय होता है। निवेशकों को जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता देनी चाहिए, पोर्टफोलियो में विविधता रखनी चाहिए और ट्रेडिंग योजना का पालन करना चाहिए ताकि बदलते बाजार में स्थिर लाभ प्राप्त किया जा सके।