बुधवार 16 सितंबर को कमोडिटी बाजार में दो साफ-साफ उलटी दिशाएं दिखीं। जहां कीमती धातुएं ऊंचे स्तर पर टिकी रहीं, वहीं कच्चे तेल पर मुनाफावसूली का दबाव पड़ा और कीमत महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सोना करीब 4,310 से 4,322 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार कर रहा है, जो अलग-अलग समय और संदर्भ स्रोतों के अनुसार करीब 0.4 से 1.7 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। चीन के घरेलू बाजार में सोना करीब 933.9 युआन प्रति ग्राम पर रहा, जो वैश्विक रुझान के साथ हल्का ऊपर गया।
सोने को सहारा देने वाले दो मुख्य कारक हैं मौद्रिक नीति में ढील की उम्मीद और सुरक्षित निवेश की मांग। अमेरिकी डॉलर सूचकांक करीब 99.6 पर और 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल करीब 5.04 प्रतिशत पर होने के बावजूद, जो परंपरागत रूप से दबाव डालते हैं, सोने ने झुकने से इनकार कर दिया।
केवल सोना ही नहीं, अन्य कीमती धातुएं भी साथ चलीं। स्पॉट चांदी करीब 64.3 डॉलर प्रति औंस पर रही, जो करीब 1.1 प्रतिशत की बढ़त है। प्लैटिनम सबसे आगे रहा और करीब 3 प्रतिशत चढ़कर 1,783 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचा, जबकि पैलेडियम करीब 1,308 डॉलर के स्तर पर थोड़ा ऊपर रहा।
प्लैटिनम की बढ़त की वजह इसकी दोहरी पहचान मानी जा रही है। इसे औद्योगिक उपयोग की मांग और सुरक्षित निवेश की भूमिका, दोनों से समर्थन मिलता है। यही कारण है कि एक ही समूह की अन्य धातुओं की तुलना में इसका दायरा बड़ा रहा।
इसके विपरीत कच्चा तेल बाजार की कमजोर कड़ी बना। WTI तेल करीब 99.8 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले दिन से करीब 2.36 प्रतिशत नीचे है और कुछ समय के लिए 100 डॉलर से नीचे भी गया। ब्रेंट क्रूड करीब 106 से 108 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में साथ चला।
इसकी मुख्य वजह लंबे समय तक ऊंची कीमतों के बाद मुनाफावसूली है। भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधा से जुड़ा जोखिम प्रीमियम पहले कीमतें ऊपर धकेल रहा था, अब वह धीरे-धीरे घट रहा है क्योंकि इसे बनाए रखने वाला कोई नया मजबूत घटनाक्रम सामने नहीं आया।
फिर भी कीमत का 100 डॉलर के नीचे जाने के बाद गहराई तक न गिरना बताता है कि कम स्तरों पर खरीदारी की प्रतीक्षा बनी हुई है। इसलिए 100 डॉलर का स्तर खरीदारों और विक्रेताओं के बीच संघर्ष क्षेत्र बना हुआ है और पूरी तरह छोड़ा नहीं गया है।
इस माहौल में अमेरिकी 30 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल करीब 5.40 प्रतिशत और 10 वर्षीय प्रतिफल करीब 5.04 प्रतिशत पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि ये ब्याज रहित परिसंपत्तियों को रखने की अवसर लागत और विकास की संभावना, दोनों तय करते हैं। पूरा बाजार 17 सितंबर की देर शाम आने वाले फेड निर्णय का इंतजार कर रहा है, जिसमें 25 आधार अंकों की कटौती करीब 3.75 से 4.00 प्रतिशत तक की सबसे प्रमुख संभावना मानी जा रही है।
निवेशकों के लिए व्यावहारिक सीख यह है कि सोने और तेल की उलटी चाल दिखाती है कि बाजार दो अलग प्रकार के जोखिमों का मूल्यांकन कर रहा है। सोना नीति की अनिश्चितता और मुद्रा के मूल्य पर प्रतिक्रिया देता है, जबकि तेल वास्तविक आपूर्ति और मांग पर। इसलिए दोनों समूहों को एक साथ पोर्टफोलियो में रखना एक दिशा पर दांव लगाने से बेहतर जोखिम प्रबंधन माना जाता है, और निर्णय आने से पहले घाटा सीमित करने का स्तर तय कर लेना सबसे समझदारी भरा कदम है।