वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोमवार को मिली-जुली तस्वीर देखने को मिली। लंदन स्पॉट बाजार में सोना लगभग 4,333 से 4,348 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार करता दिखा, जिसमें करीब 0.31 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज हुई। इसका मतलब यह है कि सोना अपने ऐतिहासिक उच्च स्तरों के आसपास उतार-चढ़ाव भरे दौर से गुजर रहा है, लेकिन किसी बड़े पतन का सामना नहीं कर रहा। न्यूयॉर्क के वायदा बाजार में सोने का भाव लगभग 4,373 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर था, जो स्पॉट कीमत से थोड़ा ऊपर बना हुआ है।
चांदी की बात करें तो न्यूयॉर्क बाजार में यह लगभग 64.57 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, जबकि इसका पिछला समापन स्तर करीब 65.19 डॉलर था। यानी चांदी में भी हल्की नरमी देखी गई। घरेलू बाजार में शंघाई गोल्ड एक्सचेंज पर सोने का डिले कॉन्ट्रैक्ट लगभग 935.93 युआन प्रति ग्राम और चांदी का डिले कॉन्ट्रैक्ट करीब 15,570 युआन प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इससे साफ है कि ऊंचे स्तर पर दोनों कीमती धातुओं में मुनाफावसूली का दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों के मुताबिक कीमती धातुओं पर इस समय दो तरह की ताकतें एक साथ काम कर रही हैं। एक तरफ अमेरिकी डॉलर सूचकांक 99 के स्तर के ऊपर टिका हुआ है और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड लगभग 4.8 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जो सोने जैसी ब्याज-रहित संपत्ति के लिए दबाव पैदा करती है। दूसरी तरफ वैश्विक अनिश्चितता और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें सोने को नीचे गिरने से रोक रही हैं। इन दोनों विपरीत शक्तियों की टक्कर के कारण सोना ऊंचे स्तर पर ही झूलता रह रहा है।
ऊर्जा बाजार में इसके उलट तस्वीर देखने को मिली। अमेरिकी कच्चा तेल वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जिसका पिछला समापन करीब 102.25 डॉलर था। इस तरह डब्ल्यूटीआई ने 100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर अपनी पकड़ बनाए रखी। दिन के कारोबार में इसका दायरा लगभग 101.59 से 103.60 डॉलर तक रहा, यानी उतार-चढ़ाव काफी बड़ा रहा।
ब्रेंट क्रूड की बात करें तो यह लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि इसका पिछला समापन करीब 107.11 डॉलर था। ब्रेंट ने 105 से 108 डॉलर के ऊंचे दायरे में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। दिन के कारोबार में इसका कारोबारी दायरा लगभग 106.11 से 108.49 डॉलर तक रहा।
तेल की कीमतों को सहारा देने में भू-राजनीतिक जोखिमों की बड़ी भूमिका रही है। वैश्विक आपूर्ति मार्गों को लेकर चल रही अनिश्चितता और उत्पादक देशों की ओर से आपूर्ति बढ़ाने को लेकर बनी हुई सस्पेंस ने तेल की कीमतों को ऊंचा बनाए रखा है। हालांकि ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली का दबाव भी साफ दिख रहा है, जिसके कारण कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव आ रहा है।
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक डॉलर 99 के ऊपर टिका रहता है और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी रहती है, तब तक सोने-चांदी जैसी धातुओं पर दबाव बना रहेगा। साथ ही अगर तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर बनी रहती हैं, तो इससे महंगाई की चिंता फिर से बढ़ सकती है, जो आगे चलकर ब्याज दरों के फैसलों को प्रभावित करेगी। यह चक्र आगे कीमती धातुओं की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
निवेशकों के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बाजार एक साथ कई संकेत दे रहा है। सोना ऊंचे स्तर पर है लेकिन गिरावट की ओर झुका हुआ है, चांदी में भी नरमी है, जबकि तेल मजबूत बना हुआ है। ऐसे में केवल एक ही परिसंपत्ति पर दांव लगाना जोखिम भरा हो सकता है। विविधता वाली रणनीति और सख्त जोखिम प्रबंधन ही इस बाजार में सुरक्षित रास्ता हो सकता है।
तकनीकी दृष्टि से देखें तो सोने के लिए 4,300 डॉलर का स्तर अहम सहारा बना हुआ है, जबकि 4,350 डॉलर के ऊपर मजबूत बंद होने पर फिर से तेजी जारी हो सकती है। चांदी के लिए 64 डॉलर का स्तर निगरानी में रखने वाला है। तेल में डब्ल्यूटीआई के लिए 100 डॉलर और ब्रेंट के लिए 105 डॉलर के स्तर आगे की दिशा तय करने में अहम माने जा रहे हैं।
कुल मिलाकर सोमवार का कमोडिटी सत्र यह बताता है कि बाजार में न तो पूरी तरह तेजी है और न ही मंदी, बल्कि एक तरह की दुविधा बनी हुई है। डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई की आशंकाएं, ये सभी कारक मिलकर कीमतों को ऊंचे स्तर पर झुला रहे हैं। ऐसे माहौल में संयम बनाए रखना और बाजार की गतिविधियों पर करीबी नजर रखना ही कारोबारियों के लिए सबसे बुद्धिमानी भरा कदम साबित होगा।
निवेशकों के लिए यह भी समझना जरूरी है कि ऊंचे स्तर पर कारोबार करते समय जोखिम प्रबंधन किसी भी अनुमान से अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। जब कीमतें शिखर के करीब हों, तो छोटी सी भी गलती बड़े नुकसान में बदल सकती है। इसलिए पोजीशन का आकार सीमित रखें, स्टॉप-लॉस अनिवार्य रूप से लगाएं और एक ही दिशा में अत्यधिक दांव लगाने से बचें। मुनाफे के पीछे भागने से पहले पूंजी की सुरक्षा को प्राथमिकता देना ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है।